चल उठ चलें कोशिश करें
कुछ फासिले हम कम करें
उल्फत यहाँ उल्फत वहां
कुछ तल्खियाँ हम कम करें
ये दूरियां मजबूरियां
ना हों यहाँ ना हों वहां
ये आरज़ू ये जुस्तजू
कुछ तुम करो कुछ हम करें
रिश्ते सभी हों मोहतरम
मौसम सरद हो कि गरम
पिघले बरफ महके फिजा
शोलों को हम शबनम करें
मैं लूँ सबक तू दे अगर
तू दे अगर मैं लूँ सबक
गीता पढ़ें कुरआँ पढ़ें
आदत यही अब हम करें
Wednesday, February 24, 2010
Wednesday, December 30, 2009
बिलकुल ना डर
देख तू बिलकुल ना डर
अंजाम की परवाह ना कर
तेज़ हो कितनी भी धूप
प्यार की एक नन्ही सी बूँद
रोक लेगी आँधियों को
सोख लेगी गर्मियों को
हर ख़ुशी उनके लिए है
जो मुसीबत में जिए हैं
है अगर जीने की हसरत
पाल ले मरने की चाहत
आसिफ सहारनी
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